इन्फोसिस ने WFH कर्मचारियों से बिजली बिल मांग लिए! क्या ये सस्टेनेबिलिटी का नया तरीका या कुछ और?

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भारत की बड़ी आईटी कंपनियों में से एक इन्फोसिस ने अपने घर से काम करने वाले (work-from-home) कर्मचारियों से एक अनोखा अनुरोध किया है। कंपनी ने कर्मचारियों से कहा है कि वे अपने घर के बिजली बिल और बिजली खपत से जुड़ी जानकारी शेयर करें।

यह जानकारी कंपनी अपनी सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग और कार्बन फुटप्रिंट को बेहतर तरीके से ट्रैक करने के लिए मांग रही है।

कंपनी ने क्या मांगा है?

इन्फोसिस के CFO जयेश संघराजका ने कर्मचारियों को एक ईमेल भेजा, जिसमें उन्होंने कहा कि हाइब्रिड वर्क मॉडल के कारण अब कंपनी का पर्यावरणीय प्रभाव ऑफिस तक सीमित नहीं रहा है। घर से काम करने के दौरान इस्तेमाल होने वाली बिजली भी कंपनी के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (GHG emissions) में जुड़ती है। इसलिए कंपनी ने एक सर्वे शुरू किया है, जिसमें कर्मचारियों से ये जानकारी मांगी गई है:

  • घर का कुल बिजली बिल (मासिक या हाल का बिल)
  • घर में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रिकल उपकरणों की डिटेल (जैसे फैन, एसी, हीटर, लाइट्स आदि)
  • इन उपकरणों की वाटेज (पावर रेटिंग)
  • क्या घर में सोलर पावर सिस्टम लगा है?
  • घर पर बिजली बचाने के लिए आपने क्या इनोवेटिव तरीके अपनाए हैं?

कंपनी ने कर्मचारियों से अनुरोध किया है कि वे “कुछ मिनट निकालकर” इस सर्वे में हिस्सा लें। यह सर्वे पूरी तरह से वॉलंटरी (स्वैच्छिक) बताया गया है, लेकिन कंपनी इसे सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग को और सटीक बनाने के लिए बहुत जरूरी मान रही है।

हाइब्रिड वर्क पॉलिसी का बैकग्राउंड

इन्फोसिस की मौजूदा हाइब्रिड पॉलिसी के तहत ज्यादातर कर्मचारी घर से काम करते हैं, लेकिन उन्हें महीने में कम से कम 10 दिन ऑफिस आना अनिवार्य है। कंपनी का कहना है कि जब कर्मचारी घर से काम करते हैं, तो उनकी बिजली खपत भी कंपनी के कुल कार्बन फुटप्रिंट में जुड़ जाती है। इसलिए यह डेटा इकट्ठा करके कंपनी अपनी रिपोर्टिंग को अपडेट करना चाहती है और घर पर एनर्जी सेविंग के लिए बेहतर सस्टेनेबिलिटी इनिशिएटिव्स लॉन्च कर सकती है।

कंपनी का सस्टेनेबिलिटी रिकॉर्ड

इन्फोसिस ने पिछले कई सालों से सस्टेनेबिलिटी पर बहुत जोर दिया है:

  • कंपनी ने ग्लोबल टाइमलाइन से पहले ही कार्बन न्यूट्रल बनने का लक्ष्य हासिल कर लिया है।
  • 2008 से अब तक प्रति व्यक्ति एनर्जी कंजम्पशन में 55% की कमी की है।
  • अपने बिल्डिंग्स में 50-60% कम बिजली खपत होती है जितनी सामान्य बिल्डिंग्स में होती है।
  • भारत में इस्तेमाल होने वाली 77% बिजली रिन्यूएबल सोर्स से आती है (2024-25 के ESG रिपोर्ट के अनुसार)।
  • कंपनी ने 2014 में खुद के रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट्स लगाने शुरू किए थे और अब 60 MW की क्षमता है।

कंपनी का कहना है कि सस्टेनेबिलिटी सिर्फ ऑफिस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी है। घर पर एनर्जी एफिशिएंट तरीके अपनाने से कंपनी का कुल उत्सर्जन कम होगा और क्लीन एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ेगा।

कर्मचारियों की प्रतिक्रिया और सवाल

कई कर्मचारियों ने इस सर्वे को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कुछ का मानना है कि यह अच्छी पहल है और कंपनी सच में पर्यावरण के प्रति जागरूक है। लेकिन कुछ कर्मचारियों ने इसे “अजीब” बताया और सवाल उठाया कि क्या कंपनी इस डेटा से घर की बिजली बिल रीइम्बर्समेंट करेगी या सिर्फ रिपोर्टिंग के लिए इस्तेमाल करेगी।

अभी तक कंपनी ने स्पष्ट रूप से कोई रीइम्बर्समेंट या बिजली बिल सब्सिडी की बात नहीं की है। यह सर्वे मुख्य रूप से डेटा कलेक्शन और बेहतर रिपोर्टिंग के लिए है।

क्या यह ट्रेंड बनेगा?

इन्फोसिस जैसी बड़ी आईटी कंपनियां पहले से ही हाइब्रिड वर्क मॉडल में हैं। अगर यह सर्वे सफल होता है और अच्छा डेटा मिलता है, तो आने वाले समय में अन्य कंपनियां भी ऐसा ही कर सकती हैं। खासकर जब कार्बन फुटप्रिंट रिपोर्टिंग और ESG (Environment, Social, Governance) स्कोरिंग पर इतना जोर है।

अगर आप इन्फोसिस में काम करते हैं और सर्वे भरने की सोच रहे हैं, तो यह आपकी कंपनी की सस्टेनेबिलिटी जर्नी में छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। साथ ही, घर पर बिजली बचाने के कुछ आसान तरीके जैसे LED बल्ब, स्मार्ट प्लग, और अनावश्यक उपकरण बंद रखना भी मददगार साबित हो सकते हैं।

क्या आपको लगता है कि कंपनियों को WFH कर्मचारियों की बिजली खपत पर ध्यान देना चाहिए? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं!


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Anjali Bhojwani
Anjali Bhojwani
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