सोना और चांदी की कीमतें क्यों रहेंगी ऊंची? वैश्विक अनिश्चितता में सुरक्षित निवेश का भरोसा कायम
भारत सरकार ने 29 जनवरी 2026 को संसद में पेश इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में सोने और चांदी को लेकर साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इनकी कीमतें ऊंची बनी रहेंगी। सर्वे के मुताबिक, वैश्विक अनिश्चितताओं, व्यापार युद्धों और भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोना और चांदी सुरक्षित निवेश (safe-haven assets) के रूप में अपनी चमक बनाए रखेंगे। जबकि अन्य कमोडिटीज की कीमतें FY27 में नरम पड़ने की उम्मीद है, लेकिन सोना-चांदी के साथ ऐसा नहीं होगा। आइए, सर्वे की मुख्य बातें और इसका आम आदमी पर क्या असर होगा, विस्तार से समझते हैं।
सर्वे में सोना-चांदी को लेकर क्या कहा गया?
- वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता (ट्रेड टेंशन, भू-राजनीतिक अस्थिरता) बनी रहने से सोना और चांदी की मांग मजबूत रहेगी।
- 2025 में सोने की कीमतें $2,607 से बढ़कर $4,315 प्रति औंस तक पहुंच गईं – यानी एक साल में बहुत तेज उछाल।
- 26 जनवरी 2026 तक सोने की कीमत $5,101.34 प्रति औंस पर थी।
- सर्वे का साफ कहना है – जब तक स्थायी शांति नहीं आती और व्यापार युद्ध खत्म नहीं होते, तब तक सोना-चांदी की कीमतें और बढ़ती रहेंगी।
- अन्य कमोडिटीज (क्रूड ऑयल, बेस मेटल्स) की कीमतें FY27 में लगभग 7% गिर सकती हैं (वर्ल्ड बैंक के अनुमान के मुताबिक), लेकिन कीमती धातुओं में ऐसा नहीं होगा।
भारत में सोना-चांदी का क्या हाल है?
- FY25 में भारत का सोना आयात 27.4% बढ़ा।
- भारत के कुल आयात में पेट्रोलियम क्रूड + सोना + पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स मिलाकर 1/3 से ज्यादा हिस्सा रखते हैं।
- सोने की ऊंची कीमतों ने घरेलू स्तर पर सोने के गहनों के बदले पर्सनल लोन में भारी उछाल लाया – नवंबर 2025 में ऐसे लोन 125.3% बढ़े।
- कुल पर्सनल लोन ग्रोथ 12.8% रही, जिसमें सोने पर लोन का योगदान बहुत बड़ा रहा।
- सरकार ने छोटे कारोबारियों के लिए सोना-चांदी के गहनों को सिक्योरिटी के रूप में इस्तेमाल करने के नियम आसान किए हैं, जिससे MSME सेक्टर में क्रेडिट फ्लो बेहतर हुआ।
सोना-चांदी की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
सर्वे और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार मुख्य कारण ये हैं:
- वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता – ट्रेड वॉर, भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी डॉलर की कमजोरी।
- सेफ-हेवन डिमांड – निवेशक और सेंट्रल बैंक दोनों सोने को सुरक्षित निवेश मान रहे हैं।
- सेंट्रल बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं (चीन, तुर्की, भारत जैसे देशों में रिजर्व में सोने का हिस्सा बढ़ रहा है)।
- भारत में त्योहारों, शादियों और निवेश की परंपरागत मांग भी बनी हुई है।
- 2025 में सोने का रिटर्न 65% से ज्यादा रहा, जबकि चांदी का 148% तक – यानी दोनों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया।
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
- सोना खरीदना महंगा रहेगा – शादियां, त्योहार या निवेश के लिए सोना लेना और महंगा हो सकता है।
- सोने पर लोन आसान और लोकप्रिय हो रहे हैं – अगर आपके पास पुराने गहने हैं तो उनसे पर्सनल लोन लेकर जरूरत पूरी कर सकते हैं।
- महंगाई पर असर – सर्वे कहता है कि सोना-चांदी की ऊंची कीमतें कोर महंगाई को चिपकाए रखती हैं, लेकिन अगर इन्हें हटा दें तो महंगाई काबू में ज्यादा दिखती है।
- इन्फ्लेशन कंट्रोल में कोई बड़ा खतरा नहीं – सरकार को उम्मीद है कि FY27 में भी महंगाई टारगेट रेंज में रहेगी।
निष्कर्ष – अभी चमक बरकरार रहेगी
इकोनॉमिक सर्वे 2026 का साफ संदेश है – सोना और चांदी अभी अपनी चमक नहीं खोएंगे। वैश्विक स्तर पर शांति और व्यापारिक स्थिरता आएगी तभी इनकी कीमतों में बड़ी गिरावट आएगी। फिलहाल अनिश्चितता का माहौल बरकरार है, इसलिए ये कीमती धातुएं निवेशकों और आम लोगों दोनों के लिए आकर्षक बनी रहेंगी।
अगर आप सोने-चांदी में निवेश करने की सोच रहे हैं तो लंबी अवधि के लिए यह अभी भी अच्छा विकल्प लग रहा है, लेकिन कीमतें बहुत ऊंची होने से छोटी मात्रा में खरीदना या SIP स्टाइल में डालना बेहतर हो सकता है।
आप क्या सोचते हैं – क्या सोना अभी भी सबसे अच्छा निवेश है या कोई और विकल्प बेहतर है? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं!
(सभी आंकड़े और अनुमान इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 और बाजार रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। निवेश से पहले विशेषज्ञ सलाह जरूर लें।)


